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बाल कुपोषण रोकथाम के लिए विभागीय समन्वय और निरंतर सहयोग बेहद आवश्यक : उपायुक्त डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर

- राज्य सहायता मिशन हरियाणा ने पलवल में की चिकित्सीय पोषण आहार के माध्यम से बाल कुपोषण प्रबंधन की पायलट परियोजना की समीक्षा

- स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के योगदान को सराहा

- पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभवों, निष्कर्षों और सुझावों पर हुई विस्तृत चर्चा

Posted On: 28 Oct 2026 7:24PM

पलवल, 28 अक्टूबर।
राज्य सहायता मिशन (एसएसएम), हरियाणा द्वारा स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एसजेएचआईएफएम) के अंतर्गत पलवल जिला में बाल कुपोषण के प्रबंधन के लिए चिकित्सीय पोषण आहार के माध्यम से संचालित पायलट परियोजना की समीक्षा को लेकर उपायुक्त डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर की अध्यक्षता में स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना के परिणामों, निष्कर्षों, सुझावों और अनुभवों पर चर्चा करते हुए बाल कुपोषण की पहचान, प्रबंधन एवं निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया। राज्य सहायता मिशन की ओर से एसजेएचआईएफएम की संयुक्त निदेशक एवं एसएसएम हरियाणा की नोडल अधिकारी डा. नीरू, टीम लीडर राहुल सिंगला तथा अर्थशास्त्र एवं वित्त क्षेत्र विशेषज्ञ डा. अमिता रानी उपस्थित रहीं।

उपायुक्त ने विभागीय समन्वय और निरंतर सहयोग पर दिया जोर
उपायुक्त डा. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने पायलट परियोजना में योगदान देने वाले सभी विभागों, संस्थानों और हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बाल कुपोषण के प्रभावी प्रबंधन के लिए विभागीय समन्वय, निरंतर सहयोग और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को आगे भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कार्यप्रणाली विकसित की जा सके।

एसजेएचआईएफएम की संयुक्त निदेशक एवं एसएसएम हरियाणा की नोडल अधिकारी डा. नीरू ने पायलट परियोजना की अवधारणा, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल कुपोषण की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान करना और उनके समुचित प्रबंधन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस दिशा में संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल और सामूहिक प्रयासों की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने राज्य सहायता मिशन के प्रयासों को सराहा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सतिंदर वशिष्ठ ने पायलट परियोजना की परिकल्पना और क्रियान्वयन के लिए राज्य सहायता मिशन, हरियाणा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाल कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इस प्रकार की पहल महत्वपूर्ण है। ऐसी परियोजनाओं से प्राप्त अनुभव भविष्य में योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और संबंधित विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

योगदान देने वाले हितधारकों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
बैठक के दौरान पायलट परियोजना के क्रियान्वयन में सहयोग देने वाले विभिन्न हितधारकों को उनके योगदान और प्रतिबद्धता के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शैक्षणिक संस्थानों तथा जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता दी गई।

बैठक में परियोजना से प्राप्त अनुभवों और सीख पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, बाल कुपोषण की समयबद्ध पहचान, उचित प्रबंधन तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

राज्य सहायता मिशन, हरियाणा ने एसजेएचआईएफएम के अंतर्गत जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ निरंतर सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। मिशन का उद्देश्य बाल कुपोषण की रोकथाम एवं प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना और विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इस दिशा में प्रभावी परिणाम हासिल करने में सहयोग देना है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सतिंदर वशिष्ठ सहित स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय पलवल तथा अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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