पशुओं को मुंह खुर व गलघोटू संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए जिला में 11 मई से शुरू होगा ‘पशु सुरक्षा चक्र’ अभियान :- उपायुक्त सचिन गुप्ता
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08 May 2026 5:09PM
रोहतक, 8 मई : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये है कि वे जिला में पशुओं को मुंह खुर एवं गलघोटू जैसी गंभीर एवं संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 11 मई 2026 से शुरू हो रहे विशेष संयुक्त टीकाकरण अभियान में सभी लक्षित पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित करवाये। पशु सुरक्षा चक्र नामक इस अभियान के अंतर्गत जिला के लगभग 2 लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।सचिन गुप्ता ने कहा कि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर घर-घर पशुओं का टीकाकरण करेंगी, ताकि कोई भी पात्र पशु टीकाकरण से वंचित न रहे। अभियान के दौरान जिला को कवर करने के लिए 65 टीकाकरण टीमों का गठन किया जाएगा। हरियाणा उन राज्यों में शामिल है, जहां मुंह खुर एवं गलघोटू रोगों के लिए संयुक्त वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है। इससे पशुओं को अलग-अलग टीके लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा पशुओं को बार-बार होने वाले तनाव से भी राहत मिलती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए। वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा, ताकि उसकी प्रभावशीलता बनी रहे।उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि टीकाकरण करवाने के लिए पशुओं की टैगिंग अनिवार्य होगी। विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी प्रत्येक पशु का पंजीकरण भारत सरकार के भारत पशुधन ऐप पर करेंगे तथा टीकाकरण के तुरंत बाद उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड करेंगे। इससे पूरे अभियान में पारदर्शिता बनी रहेगी और पशुपालकों को पशुओं का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। टीकाकरण के उपरांत पशुपालक के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा, जो ऑनलाइन सत्यापन एवं रिकॉर्ड की प्रमाणिकता के लिए आवश्यक है। उन्होंने पशुपालकों का आह्वान किया है कि वे अपना ओटीपी केवल अधिकृत पशुपालन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी को ही उपलब्ध करवाएं।पशुपालन विभाग के कार्यकारी उप निदेशक डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि मुंह खुर एवं गलघोटू दोनों ही पशुओं में अत्यंत गंभीर और संक्रामक बीमारियां हैं। मुंह खुर रोग में तेज बुखार, अधिक लार गिरना, मुंह और पैरों में छाले, भूख कम लगना तथा दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं गलघोटू रोग में तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई तथा गले के नीचे सूजन जैसे लक्षण पाए जाते हैं, जो कई बार पशुओं की मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं।डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित एवं प्रभावी है। कभी-कभी टीकाकरण के बाद पशु को हल्का बुखार आ सकता है, जो सामान्य प्रक्रिया है और सामान्य देखभाल से ठीक हो जाता है। उन्होंने सभी पशुपालकों से अपील की कि वे विभाग की टीमों का सहयोग करें तथा अपने सभी पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाकर उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखें।
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(Release ID: 1343)