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पांडुलिपियों के संरक्षण में कुरुक्षेत्र हरियाणा प्रदेश में सभी जिलों से रहा अव्वल : विश्राम कुमार मीणा

कुरुक्षेत्र में प्रदेश की सबसे ज्यादा 15818 पांडुलिपियों की करी पहचान -जिले के गांव व शहरों में 515 सर्वेवर कर रहे हैं पांडुलिपियों की खोज

Posted On: 25 May 2026 2:38PM

कुरुक्षेत्र, 25 मई। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम मिशन योजना के अंतर्गत देश की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के संरक्षण का कार्य कुरुक्षेत्र में जोरों से किया जा रहा है। जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में 515 सर्वेवर पांडुलिपियों की खोज करने के लिए लगाए हुए हैं। अब तक जिले में 15818 पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों के संरक्षण करने में कुरुक्षेत्र जिला हरियाणा प्रदेश के सभी जिलों में अव्वल रहा है। आगे भी इस अभियान को निरंतर चलाया जा रहा है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा सोमवार को लघु सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण को लेकर समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बैठक में जिले में उपलब्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई। बैठक में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ पंकज सेतिया भी मौजूद रहे। अब तक जिले में श्रीकृष्ण संग्रहालय में 140, पांडुलिपि संसाधन एवं संरक्षण केंद्र केयूके में 15678 चिन्हित करने के उपरांत ज्ञान भारतम मिशन पर अपलोड किया जा चुका है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि इस अभियान को रेवेन्यू विभाग के माध्यम से सभी गांवों को जोड़ा गया है और प्रत्येक गांव में मुनियादी भी करवाई जा चुकी है। इसके अलावा 515 सर्वेवर को लगाकर नागरिकों को जागरूक भी किया जा रहा है, जो गांव व शहर में मिलने वाली पांडुलिपि को ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड करवाएंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत 75 वर्ष या इससे ज्यादा पुरानी पांडुलिपि को ज्ञान भारतम मिशन योजना के तहत अपलोड करवाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले के विभिन्न मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास उपलब्ध संस्कृत, हिंदी, फारसी व अन्य भाषाओं की पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया गया। चिह्नित पांडुलिपियों को वैज्ञानिक विधि से डिजिटाइज कर ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड करने की रूपरेखा तैयार की गई। इससे शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और आमजन को प्राचीन ज्ञान तक आसान पहुंच मिलेगी। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों के भौतिक संरक्षण के साथ-साथ उनके विषय-वस्तु के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया। इसमें स्थानीय विद्वानों, इतिहासकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं से अपील की गई कि वे अपने संग्रह की पांडुलिपियों को इस राष्ट्रीय मिशन में सहयोग हेतु उपलब्ध कराएं।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य भारत की ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।  ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले जिले कुरुक्षेत्र में यह अभियान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां महाभारत काल से जुड़ी अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन ने सभी संबंधितों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।


 

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(Release ID: 1994)