चंडीगढ़, 28 जुलाई - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट तथा निश्चित शुल्क निर्धारित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
यह निर्णय प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पंजीकृत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लाभार्थियों के लिए पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 60 वर्गमीटर तक के पात्र आवासीय इकाइयों पर लागू होगा। स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट, समयबद्ध और महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में घर खरीदने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है।
प्रस्ताव के अनुसार, पात्र आवासीय इकाइयों के लिए कन्वेयंस डीड (स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेजों) पर प्रति दस्तावेज 500 रुपये शुल्क लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए, जो हरियाणा में लागू है, के अंतर्गत देय स्टांप ड्यूटी भी घटाकर 500 रुपये प्रति दस्तावेज कर दी गई है।
इस निर्णय से ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लाभार्थियों पर आवास खरीद से संबंधित लेन-देन व वित्तीय बोझ कम होगा। इससे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत ‘‘सभी के लिए आवास’’ के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में हरियाणा में कन्वेयंस डीड पर भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए के तहत 5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी तथा 2 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देय है। यदि संपत्ति का हस्तांतरण किसी महिला के पक्ष में किया जाता है तो 2 प्रतिशत की छूट उपलब्ध है। वहीं, पंजीकरण शुल्क स्लैब के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 50,000 रुपये है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पात्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों के लिए किफायती आवास को बढ़ावा देने के स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में यह विशेष रियायत प्रदान कर किफायती आवास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, पात्र कन्वेयंस डीड पर स्टाम्प डयूटी पंजीकरण शुल्क में छूट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
क्रमांक-2026
रेवाड़ी में बनेगी कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी
-इसका उद्देश्य हायर एजुकेशन की क्षमता बढ़ाना
चंडीगढ़, 28 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 में संशोधन करके, कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, रेवाड़ी नाम से एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के लिए बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई। इस एक्ट को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ (संशोधित) एक्ट, 2026 कहा जा सकता है।
राज्य के युवाओं के लिए हायर एजुकेशन के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने और उन्हें बढ़ाने की ज़रूरत है। हायर एजुकेशन में विद्यार्थियों की बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी को समायोजित करने और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 के अनुसार 50 प्रतिशत ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो के लक्ष्य को पार करने के लिए हमें 2030 तक सभी स्तर पर संस्थानों की संख्या लगभग दोगुनी करनी होगी। हायर एजुकेशन में इस बेंचमार्क को पूरा करने के लिए सरकारी दखल काफी नहीं होगा। हमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बड़े पैमाने पर शामिल करने की ज़रूरत है। हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 असल में हायर एजुकेशन में कैपेसिटी बढ़ाने और इसके स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने में सरकार की पहल को सहयोग करने के लिए प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने के लिए लाया गया है।
अधिनियम अनुसार उद्देश्य को पाने के लिए मंत्री परिषद ने रेवाड़ी में कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए एक बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।
क्रमांक 2026
हरियाणा में बनेगा लोकल ऑडिट एक्ट, 2026
-फाइनेंशियल जवाबदेही को मज़बूत करने, स्वतन्त्र ऑडिट के लिए मज़बूत लीगल सपोर्ट वाला एक्ट बनेगा
चंडीगढ़, 28 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट मीटिंग में हरियाणा लोकल ऑडिट एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट को मंज़ूरी दी गई। प्रस्तावित एक्ट का उद्देश्य राज्य में सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटी बॉडी, इंस्टीट्यूशन और फंड के लिए एक प्रभावी और कुशल ऑडिट कानून बनाना है तथा इससे या इनसे जुड़े मामलों के लिए भी प्रावधान करना है।
कई राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट (जिसे लोकल फंड डिपार्टमेंट भी कहा जाता है) के अपने अधिनियम और नियम हैं। जैसे, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 2014, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 2016, गुजरात लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1963, गुजरात लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 1974, केरल लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1994 आदि।
भारत के दूसरे राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट के एक्ट/रूल्स और लोकल फण्ड डिपार्टमेंट हरियाणा के कामकाज को देखते हुए सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटीज, बॉडी या इंस्टीट्यूशन और उनसे जुड़े फंड और मामलों के लिए प्रभावी और कुशल ऑडिट सिस्टम बनाने के लिए विभाग को एक एक्ट तैयार करने की भी ज़रूरत है।
एक खास लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट एक्ट बनाने का मुख्य उद्देश्य एक मज़बूत कानूनी ढांचा तैयार करना है जो लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट को लोकल बॉडी और दूसरे लोकल फंड वाली इंस्टीट्यूशन का स्वतन्त्र रूप और प्रभावी करने का अधिकार देता है। ऑडिटर के सामने रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर करने या जवाबदेही तय करने हेतू मज़बूत कानूनी शक्तियों की ज़रूरत है। लोकल अथॉरिटीज़ को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी सिस्टम बनाना है तकि ऑडिट पैरा का तय समय में जवाब दें सके।
यह अधिनियम लोकल ऑडिट के डायरेक्टर को वितिय गड़बड़ियों के लिए सीधे ज़िम्मेदार लोगों को सरचार्ज नोटिस जारी करने का कानूनी अधिकार देगा। यह एक्ट ऑडिट फ्रेमवर्क को लोकल पॉलिटिकल या एडमिनिस्ट्रेटिव दखल से बचाने के लिए कानूनी सपोर्ट देगा। यह राज्य विधानसभा को सालाना ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के लिए कानूनी समय सीमा तय करता है, जिससे पारदर्शी सुनिश्चित होती है।
क्रमांक 2026
हरियाणा के 60 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में एमएसएमई एवं निर्यात क्षेत्र के लिए 60 परिवर्तनकारी पहलें
उद्यमिता, विनिर्माण, निर्यात एवं रोजगार को गति प्रदान करने हेतु एक ऐतिहासिक नीति
चंडीगढ़,28 जुलाई: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया एवं विकसित भारत–2047 की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से प्रेरित होकर, हरियाणा सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व एवं माननीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री राव नरबीर सिंह के मार्गदर्शन में आज हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 का अनावरण किया। यह नीति सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए राज्य का अब तक का सर्वाधिक महत्वाकांक्षी नीतिगत ढांचा है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निरंतर इस बात पर बल दिया है कि एमएसएमई क्षेत्र भारत के विनिर्माण एवं औद्योगिक विकास की रीढ़ है तथा जब एमएसएमई आगे बढ़ते हैं, तभी भारत भी प्रगति करता है। इसी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर हरियाणा ने एमएसएमई क्षेत्र को अपनी विकास रणनीति के केंद्र में स्थान दिया है तथा इसे निवेश, नवाचार, रोजगार सृजन एवं निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार माना है।
हरियाणा अपनी विकास यात्रा के 60 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस अवसर पर राज्य सरकार ने प्रदेश के 14 लाख से अधिक एमएसएमई के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 60 परिवर्तनकारी पहलों को समर्पित किया है। इस नीति के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र में ₹55,000 करोड़ से अधिक के निवेश को आकर्षित करने, पाँच लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करने तथा हरियाणा के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से हरियाणा को विनिर्माण, उद्यमिता एवं वैश्विक व्यापार के लिए भारत के सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी राज्यों में स्थापित करने का उद्देश्य है।
हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 राज्य सरकार के संकल्प पत्र में किए गए वादों को धरातल पर उतारने, राज्य बजट 2026–27 में की गई प्रमुख घोषणाओं को क्रियान्वित करने, हरियाणा विज़न–2047 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने तथा भारत सरकार के रेज़िंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP) कार्यक्रम के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
नीति की 60 परिवर्तनकारी पहलें छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों—वित्त, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, निर्यात, सतत विकास तथा कौशल विकास—पर आधारित हैं। यह व्यापक ढांचा एमएसएमई को उनकी स्थापना से लेकर विस्तार तक प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान करेगा। यह नीति हरियाणा के सभी क्षेत्रों के उद्यमों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है तथा पारंपरिक एवं उच्च-विकास क्षमता वाले प्रमुख क्षेत्रों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करती है। इनमें ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस एवं रक्षा, सामान्य इंजीनियरिंग, धातु उत्पाद एवं इस्पात निर्माण, विद्युत उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं वैज्ञानिक उपकरण, औषधि एवं चिकित्सा उपकरण, रबर एवं प्लास्टिक (खिलौने एवं खेल सामग्री सहित), फुटवियर एवं चमड़ा उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं हरित उद्योग, वस्त्र एवं परिधान, तथा कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध उद्योग शामिल हैं। हरियाणा की सुदृढ़ कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था तथा राज्य के आर्थिक विकास में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एमएसएमई नीति के पूरक के रूप में हरियाणा कृषि-व्यवसाय एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति–2026 भी अधिसूचित की है।
एमएसएमई के समक्ष प्रारंभिक पूंजी निवेश की बाधा को दूर करने के उद्देश्य से, इस नीति के अंतर्गत नवप्रारंभ हरियाणा उद्यम विकास मिशन के माध्यम से हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल नीति के तहत सफलतापूर्वक लागू पूंजी निवेश सब्सिडी मॉडल का विस्तार किया गया है। पहली बार, राज्य में चिन्हित प्राथमिकता प्राप्त (थ्रस्ट) क्षेत्रों के एमएसएमई एवं निर्यातकों को राज्यव्यापी समर्पित कार्यक्रम के अंतर्गत पूंजी निवेश सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नीति में वित्तीय प्रोत्साहनों का एक व्यापक पैकेज भी शामिल किया गया है, जिसमें ब्याज अनुदान, स्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन हेतु प्रोत्साहन, बीमा सहायता तथा परीक्षण, स्वचालन (ऑटोमेशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस–एआई) एवं अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। एमएसएमई के लिए वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में, इस नीति में संस्थागत ऋण तक सुगम पहुँच सुनिश्चित करने तथा बिना जमानत (कोलेटरल-फ्री) ऋण उपलब्ध कराने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य वेंचर कैपिटल फंड तथा क्षेत्र-विशिष्ट क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना का भी प्रस्ताव किया गया है।
एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए विश्वस्तरीय अवसंरचना को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए, इस नीति में साझा औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से कारोबार करने की लागत को कम करने पर विशेष बल दिया गया है। हरियाणा क्लस्टर प्लग एंड प्ले योजना तथा हरियाणा एमएसई कॉमन फैसिलिटी सेंटर योजना की उल्लेखनीय सफलता के आधार पर, इन पहलों का व्यापक विस्तार किया गया है, ताकि एमएसएमई को उच्च गुणवत्ता वाली साझा अवसंरचना, उन्नत मशीनरी, परीक्षण एवं डिजाइन सुविधाओं तथा अन्य साझा सेवाओं तक किफायती लागत पर पहुंच उपलब्ध हो सके। क्लस्टर आधारित विकास एवं संसाधनों के साझा उपयोग को बढ़ावा देकर यह नीति उत्पादकता में वृद्धि, गुणवत्ता में सुधार तथा पूंजीगत एवं परिचालन लागत में कमी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है, जिससे एमएसएमई अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
हरियाणा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से यह नीति देश के सर्वाधिक व्यापक एमएसएमई निर्यात संवर्धन ढांचों में से एक प्रस्तुत करती है। यह स्वीकार करते हुए कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केवल वित्तीय प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैं, नीति में निर्यात के लिए तैयार उद्यमों का विकास करने हेतु एक समग्र (एंड-टू-एंड) दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसके अंतर्गत उद्यमों की क्षमता का सुदृढ़ीकरण, बाजार संबंधी जानकारी (मार्केट इंटेलिजेंस) को सशक्त बनाना, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच का विस्तार करना तथा वैश्विक व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना शामिल है। प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री प्रथम निर्यातक प्रोत्साहन योजना के माध्यम से विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही, सभी श्रेणियों के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण, निर्यात बीमा, मालभाड़ा सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इन पहलों का उद्देश्य निर्यात करने वाले एमएसएमई की संख्या में वृद्धि करना, निर्यात बाजारों एवं उत्पादों में विविधता लाना तथा हरियाणा के उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (ग्लोबल वैल्यू चेन्स) से और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना है।
इन वित्तीय प्रोत्साहनों के पूरक के रूप में, नीति हरियाणा के एमएसएमई को वैश्विक बाजारों से जोड़ने हेतु एक सुदृढ़ संस्थागत तंत्र की स्थापना का प्रावधान करती है। हरियाणा निर्यात केंद्र एक वन-स्टॉप एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर के रूप में कार्य करेगा, जो निर्यात प्रलेखन, नियामकीय अनुपालन, गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स, बाजार संबंधी जानकारी तथा खरीदारों से संपर्क स्थापित करने सहित सभी आवश्यक सेवाओं के लिए समग्र सहायता प्रदान करेगा।
नीति के प्रमुख घटक 'उड़ान द्वार' प्लेटफॉर्म को एमएसएमई के वैश्विक विकास के लिए एक वर्चुअल केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मंच निर्यात के लिए खरीदारों एवं विक्रेताओं के मध्य संपर्क (एक्सपोर्ट मैचमेकिंग), अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ संयुक्त उपक्रम, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा निवेशकों के साथ सहभागिता को सुगम बनाएगा। इसके अतिरिक्त, रिवर्स बायर-सेलर मीट, राज्य सरकार के नेतृत्व में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रोड शो, डिजिटल एमएसएमई पवेलियन तथा विक्रेता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक खरीदारों, एंकर उद्योगों तथा मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे हरियाणा के एमएसएमई के लिए दीर्घकालिक बाजार अवसर उपलब्ध होंगे तथा वे घरेलू एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और अधिक प्रभावी रूप से एकीकृत हो सकेंगे।
वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) की भूमिका निरंतर महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह नीति ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की अवधारणा तथा पर्यावरणीय अनुपालन को बढ़ावा देकर हरियाणा के एमएसएमई के हरित परिवर्तन को गति प्रदान करती है। इसके अंतर्गत एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) तथा जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रणालियों को अपनाने के लिए भी लक्षित सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, समर्पित हरित निवेश कोष (ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड) की स्थापना के माध्यम से सतत विनिर्माण एवं हरित नवाचार में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे एमएसएमई वैश्विक स्तर पर विकसित हो रहे सतत विकास मानकों का अनुपालन करने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सक्षम होंगे।
नई नीति में समावेशी औद्योगिक विकास को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति के उद्यमियों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों, भूतपूर्व सैनिकों, अग्निवीरों तथा प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों के लिए लक्षित सहायता का प्रावधान किया गया है। क्लस्टर आधारित विकास, उद्यमिता संवर्धन, कौशल विकास तथा रोजगार-सृजन आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेशभर में एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना तथा यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक विकास का लाभ प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
एमएसएमई क्षेत्र को समर्पित 60 परिवर्तनकारी पहलों के साथ हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति–2026 राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए एमएसएमई सुधारों के सबसे व्यापक कार्यक्रमों में से एक है। ये सभी पहलें सामूहिक रूप से निवेश को गति प्रदान करेंगी, उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ बनाएंगी, गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर सृजित करेंगी, निर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगी तथा सतत औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करेंगी। इसके माध्यम से विकसित भारत–2047 के विज़न के अनुरूप हरियाणा विनिर्माण, नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में भारत के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
क्रमांक-2026
चंडीगढ़, 28 जुलाई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में पुलिस हिरासत में मौत होने पर मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी/निकटतम परिजन को जेल नीति के अनुसार मुआवजा प्रदान करने को मंजूरी प्रदान की गई।
इस नीति का उद्देश्य निर्धारित परिस्थितियों में पुलिस हिरासत में मौत होने पर मृतक के परिवारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही, इस नीति में स्पष्ट रूप से उन परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें मुआवजा देय होगा अथवा नहीं होगा।
निर्णय के अनुसार, प्राकृतिक मृत्यु, जिसमें बीमारी के कारण हुई मृत्यु भी शामिल है, के मामलों में मुआवजा देय नहीं होगा। इसी प्रकार, यदि किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत से भागने के दौरान मृत्यु हो जाती है अथवा पुलिस हिरासत में रहते हुए किसी प्राकृतिक आपदा या प्राकृतिक विपदा के कारण मृत्यु होती है, तो ऐसे मामलों में भी मुआवजा प्रदान नहीं किया जाएगा।
हालांकि, पुलिस हिरासत में अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी अथवा निकटतम परिजन को 7.50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाएगा। यह मुआवजा उन मामलों में देय होगा, जहां हिरासत में बंद अथवा गिरफ्तार व्यक्तियों के बीच आपसी झगड़े के कारण मृत्यु हो, पुलिस कर्मियों द्वारा यातना या मारपीट के कारण मृत्यु हो, पुलिस हिरासत में आत्महत्या की घटना हो अथवा पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी में लापरवाही के कारण मृत्यु हुई हो।
पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही के मामलों में मुआवजा तभी देय होगा, जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में लापरवाही सिद्ध हो जाए।
इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा यातना या मारपीट के कारण हुई मृत्यु के मामलों में दिए जाने वाले मुआवजे का कम से कम 50 प्रतिशत संबंधित दोषी अधिकारी या कर्मचारी के वेतन से वसूल किया जाएगा। यदि एक से अधिक अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके वेतन से वसूली जाने वाली राशि का अनुपात प्रत्येक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा के पुलिस महानिदेशक द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
क्रमांक 2026
पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण का दायरा बढ़ाया
चंडीगढ़, 28 जुलाई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के निवासी पूर्व अग्निवीरों को प्रत्यक्ष भर्ती में अग्निशमन सेवा विभाग में फायर ऑपरेटर- कम -ड्राइवर, पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड तथा गृह विभाग के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) में कांस्टेबल के पदों पर 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण प्रदान करने को मंजूरी दी गई।
भारत सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सशस्त्र बलों में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले प्रशिक्षित अग्निवीरों को भविष्य में सार्थक रोजगार के अवसर मिलें। यह पहल अग्निपथ योजना के दीर्घकालिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्हें सरकारी सेवाओं में रोजगार का स्पष्ट अवसर प्रदान करती है।
इसी उद्देश्य के अनुरूप हरियाणा सरकार ने सैन्य सेवा पूरी कर लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों को प्रत्यक्ष भर्ती में आरक्षण देने के विषय पर विचार किया। इसके बाद राज्य सरकार ने हरियाणा के अधिवासी पूर्व अग्निवीरों को होरिजेंटल आरक्षण का लाभ देने का निर्णय लिया।
इससे पहले हरियाणा सरकार पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-‘सी’ पदों, जैसे पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में फॉरेस्ट गार्ड, कारागार विभाग में वार्डर तथा खान एवं भू-विज्ञान विभाग में ग्रुप-‘डी’ के माइनिंग गार्ड के पदों पर 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण प्रदान कर चुकी है।
इसके अलावा राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-‘बी’ के पदों पर 1 प्रतिशत, ग्रुप-‘सी’ के पदों पर 5 प्रतिशत, पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पदों पर 20 प्रतिशत तथा फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डर और माइनिंग गार्ड के पदों पर 20 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध करवा चुकी है। उल्लेखनीय है कि फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डर और माइनिंग गार्ड के पदों पर आरक्षण को पहले के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया है।
इसके बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने गृह विभाग के अंतर्गत राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी), अग्निशमन सेवा विभाग में फायर ऑपरेटर- कम -ड्राइवर तथा पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड के पदों पर भी पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण का लाभ देने का सुझाव दिया। मंत्रिमंडल की मंजूरी के साथ इन सिफारिशों को लागू किया जाएगा।
आईआरबी, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा विभाग तथा पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण दिए जाने से उन्हें सरकारी रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, राज्य सरकार उनकी सैन्य सेवा के दौरान अर्जित कौशल और प्रशिक्षण का उपयोग इन विशेषीकृत सेवाओं को और मजबूत बनाने में कर सकेगी।
यह निर्णय न केवल पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करेगा, बल्कि राज्य की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अग्निशमन सेवाओं और वन्यजीव संरक्षण सेवाओं को भी सुदृढ़ करेगा। साथ ही, यह अग्निपथ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देगा और सैन्य सेवा पूरी करने के बाद पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में सहज कैरियर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
क्रमांक-2026
हरियाणा कैबिनेट ने आबादी देह क्षेत्रों में स्वामित्व अधिकारों को दर्ज करने और उनके निपटारे के नियमों को दी मंजूरी
दावों का निपटारा होगा पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष
चंडीगढ़, 28 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) अधिनियम, 2025' के तहत बनाए गए 'हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम, 2026' को स्वीकृति प्रदान की गई।
ये नियम अधिनियम को व्यावहारिक रूप देने और पूरे राज्य में आबादी देह (लाल डोरा) क्षेत्रों के भीतर स्थित संपत्तियों के स्वामित्व अधिकारों को दर्ज करने, निहित करने तथा उनका निपटारा करने के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करने के उद्देश्य से स्वीकृत किए गए हैं।
यह निर्णय ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति धारकों को कानूनी स्पष्टता प्रदान करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जहां लंबे समय से कब्जा होने के बावजूद ऐतिहासिक रूप से स्वामित्व अधिकार दर्ज नहीं रहे हैं। ये नियम अधिकारों के स्थाई
रिकॉर्ड तैयार करने की सुविधा प्रदान करेंगे और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्वामित्व निर्धारित करने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे।
नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि स्वामित्व अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया संक्षिप्त (समरी) कार्यवाहियों के माध्यम से की जाएगी। दावों के निष्पक्ष न्यायनिर्णयन को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के तहत नामित अधिकारियों को व्यक्तियों को समन भेजने, दस्तावेज़ मंगवाने और साक्ष्य दर्ज करने हेतु सिविल कोर्ट के समान शक्तियां प्रदान की जाएंगी। अधिकारों के प्रारूप रिकॉर्ड (ड्राफ्ट रिकॉर्ड) को प्रकाशित किया जाएगा, हितधारकों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा के लिए एक प्रभावी अपील एवं पुनरीक्षण (रिवीजन) तंत्र को शामिल किया गया है।
यह पहल स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के किए गए सर्वेक्षण और मैपिंग पर आधारित है, जिसे 8 मार्च 2019 को भारतीय सर्वेक्षण विभाग और हरियाणा सरकार के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के बाद शुरू किया गया था। संपत्तियों की सटीक पहचान और मैपिंग के लिए आधुनिक सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया गया है, जिसने स्पष्ट स्वामित्व रिकॉर्ड स्थापित करने की नींव रखी है।
कैबिनेट के इस निर्णय से लाखों ग्रामीण संपत्ति धारकों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त स्वामित्व रिकॉर्ड मिलने, संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आने, भूमि प्रशासन के मजबूत होने और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी वित्तीय व अन्य संस्थागत सेवाओं तक पहुंच में सुधार होने की उम्मीद है।
क्रमांक -2026
हरियाणा मंत्रिमंडल ने हरियाणा राजस्व पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधनों को दी मंज़ूरी
प्रशिक्षण अवधि घटाकर एक वर्ष की गई
नियुक्त पटवारियों को वजीफे (स्टाइपेंड) के स्थान पर मिलेगा वेतन
चंडीगढ़, 28 जुलाई - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राजस्व पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी गई। इन संशोधनों का उद्देश्य राजस्व पटवारियों के भर्ती और प्रशिक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण करना, उनकी सेवा शर्तों में सुधार करना तथा राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाना है। संशोधित नियम 1 जनवरी, 2025 से लागू माने जाएंगे।
मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया एक प्रमुख निर्णय नए नियुक्त पटवारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ वर्ष से घटाकर एक वर्ष करना है। संशोधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवार स्कूल में छह महीने का संस्थागत प्रशिक्षण और उसके बाद छह महीने का फील्ड प्रशिक्षण शामिल होगा। यह निर्णय राज्य स्तरीय पटवारी सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है और इससे फील्ड ड्यूटी के लिए प्रशिक्षित पटवारियों की जल्द उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने नए नियुक्त पटवारियों की सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण सुधार को भी मंज़ूरी दी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान वजीफा (स्टाइपेंड) मिलने के बजाय, अब उन्हें फंक्शनल पे-लेवल-2 (FPL-2) में 19,900 रुपये का शुरुआती वेतन दिया जाएगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर, उन्हें पिछले फंक्शनल पे-लेवल-4 के स्थान पर 32,100-1,02,000 रुपये के वेतनमान के साथ फंक्शनल पे लेवल-5A में रखा जाएगा।
पेशेवर दक्षता सुनिश्चित करने के लिए, संशोधित नियमों में प्रावधान है कि अस्थायी रूप से नियुक्त प्रत्येक पटवारी को निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अधिकतम चार अवसर दिए जाएंगे।
संशोधित नियमों में यह भी प्रावधान है कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान कोई वार्षिक वेतन वृद्धि (increment) स्वीकार्य नहीं होगी, और पहली वेतन वृद्धि नियमित नियुक्ति का एक वर्ष पूरा होने के बाद ही देय होगी। कर्मचारियों के हित में किए गए एक अन्य उपाय के तहत, उम्मीदवारों को केवल पांच जिलों की वरीयता देने के मौजूदा प्रावधान को बदलकर पदस्थापना के लिए सभी जिलों को चुनने का विकल्प दिया गया है।
मंत्रिमंडल ने राजस्व पटवारियों को हरियाणा सिविल सेवाएं (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के प्रावधानों के तहत लाकर अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित संशोधनों को भी मंज़ूरी दे दी है, जिसमें सेवा नियमों में संशोधित अनुशासनात्मक और अपीलीय अधिकारियों को निर्दिष्ट किया गया है।
इसके अलावा, विभागीय परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को कंप्यूटर अनुप्रयोगों, भूमि अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों, डैशबोर्ड, पोर्टल और अन्य डिजिटल गवर्नेंस प्रणालियों को शामिल करने के लिए अपडेट किया गया है, जिससे पटवारी तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित होते राजस्व प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकें।
क्रमांक -2026
हरियाणा कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल और विविध पद (राज्य समूह-सी) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को दी मंजूरी
-सेवा नियमों में वरिष्ठ रेडियोलॉजी अधिकारी के नए बनाए गए 22 पदों को किया गया शामिल
चंडीगढ़, 28 जुलाई - मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल और विविध पद (राज्य समूह-सी) सेवा नियम, 1998 में संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई। यह संशोधन मुख्य रूप से सेवा नियमों में वरिष्ठ रेडियोलॉजी अधिकारी के नए बनाए गए 22 पदों को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणाली में रेडियोलॉजी पेशेवरों की बदलती भूमिका के अनुरूप मौजूदा रेडियोग्राफर पदों के नाम को 'रेडियोलॉजी अधिकारी' में बदलने का प्रावधान करते हैं।
यह संशोधन 10 जून, 2020 को जारी एक सरकारी अधिसूचना के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक-एक, यानी वरिष्ठ रेडियोग्राफर के 22 पदों के सृजन के बाद आवश्यक हो गए थे। ये पद विभाग में कार्यरत पात्र रेडियोग्राफरों में से पदोन्नति द्वारा भरे जाने हैं।
संशोधित नियमों के तहत, 22 स्वीकृत पदों के साथ सेवा नियमों में वरिष्ठ रेडियोलॉजी अधिकारी की एक नई श्रेणी शुरू की गई है। यह पद FPL-6, सेल-I (35,400 रुपये - 1,12,400 रुपये) का वेतनमान वहन करेगा और इसे मुख्य रूप से निर्धारित योग्यताओं और न्यूनतम पांच वर्ष की नियमित सेवा वाले रेडियोलॉजी अधिकारियों में से पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा। निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन किसी भी राज्य सरकार या भारत सरकार की सेवा से स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट ने पूरे सेवा नियमों में नियुक्ति, पदोन्नति, अनुशासनात्मक मामलों और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले प्रासंगिक परिशिष्टों (appendices) सहित 'रेडियोग्राफर' पदनाम को बदलकर 'रेडियोलॉजी अधिकारी' करने वाले संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है।
इसके अलावा, संशोधित नियमों में मौजूदा सरकारी नीतियों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नियुक्तियों में आरक्षण, सीधी भर्ती में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अनुभव में छूट, पात्रता शर्तों और नागरिकता आवश्यकताओं से संबंधित संशोधित प्रावधान शामिल हैं।
इन संशोधनों से स्वास्थ्य विभाग में रेडियोलॉजी पेशेवरों के करियर की प्रगति को मजबूती मिलने, सेवा नामकरण में एकरूपता सुनिश्चित होने, समय पर पदोन्नति की सुविधा मिलने और राज्य के स्वास्थ्य कार्यबल को समकालीन चिकित्सा पद्धतियों के साथ संरेखित करने की उम्मीद है, जिससे हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सेवाओं में सुधार होगा।
क्रमांक -2026
महिलाओं के नाम वाहन खरीदने पर मोटर वाहन टैक्स में मिलेगी 1 प्रतिशत छूट
महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा, 20 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले निजी वाहनों पर मिलेगी रियायत
चंडीगढ़, 28 जुलाई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य में महिलाओं के नाम पर खरीदे और पंजीकृत किए जाने वाले 20 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले गैर-व्यावसायिक (नॉन-ट्रांसपोर्ट) वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स में 1 प्रतिशत छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।
निर्णय के अनुसार, महिलाओं के नाम पर नए पंजीकृत होने वाले गैर-व्यावसायिक वाहनों पर एक्स-शोरूम कीमत के 1 प्रतिशत के बराबर मोटर वाहन टैक्स में छूट दी जाएगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को लागू करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपने नाम पर वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सरकार का मानना है कि इस टैक्स रियायत से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को भी बल मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 2016 के तहत राज्य सरकार विभिन्न श्रेणियों के वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स की दरें निर्धारित करती है। वर्तमान में निजी उपयोग के वाहनों पर टैक्स उनकी एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर लगाया जाता है। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि बजट में घोषित 1 प्रतिशत टैक्स छूट का लाभ केवल उन गैर-व्यावसायिक वाहनों पर मिलेगा जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 20 लाख रुपये तक होगी। यह छूट वर्तमान में लागू मोटर वाहन टैक्स के अतिरिक्त प्रदान की जाएगी।
क्रमांक -2026
हरियाणा ने 30 लाख रुपये तक के इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी पूर्ण कर छूट
30 लाख रुपये से अधिक कीमत के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट
चंडीगढ़, 28 जुलाई - स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा मंत्रिमंडल ने राज्य में खरीदे और पंजीकृत किए गए 30 लाख रुपये तक के एक्स-शोरूम मूल्य वाले नए विशुद्ध इलेक्ट्रिक/बैटरी से चलने वाले दो पहिया, तीन पहिया (ऑटो/ई-रिक्शा) और चार पहिया वाहनों के पंजीकरण के समय मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट को मंज़ूरी दे दी है। साथ ही 30 लाख रुपये से अधिक कीमत के इलेक्ट्रिक वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट को भी मंजूरी दी गई।
यह निर्णय इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए अधिक प्रोत्साहन प्रदान करने और पूरे राज्य में स्वच्छ व पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को गति देने के लिए 2 मार्च, 2026 को प्रस्तुत हरियाणा बजट 2026-27 में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को पूरा करता है।
वर्तमान में, हरियाणा इलेक्ट्रिक/बैटरी चालित वाहनों और सीएनजी (CNG) वाहनों के पंजीकरण पर एकमुश्त मोटर वाहन कर में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान करता है। नवीनतम मंज़ूरी के साथ, पात्र इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मौजूदा छूट को बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक के एक्स-शोरूम मूल्य वाले नए विशुद्ध इलेक्ट्रिक/बैटरी चालित दो पहिया, तीन पहिया (ऑटो/ई-रिक्शा) और चार पहिया वाहनों के नए पंजीकरण के लिए पूर्ण (100 प्रतिशत) छूट कर दिया गया है।
हालांकि, सीएनजी वाहनों के लिए एकमुश्त मोटर वाहन कर में मौजूदा 20 प्रतिशत की छूट बिना किसी बदलाव के जारी रहेगी।
यह निर्णय हरियाणा मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत लिया गया है, जिसके तहत राज्य सरकार को हरियाणा में पंजीकृत और संचालित विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए मोटर वाहन कर की दरें निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।
इस बढ़ी हुई कर छूट से इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक किफायती बनाकर राज्य में उनकी खरीद और पंजीकरण को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह पहल वाहनों के उत्सर्जन को कम करने, प्रदूषण पर अंकुश लगाने, वायु गुणवत्ता में सुधार करने और हरियाणा में पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने में भी योगदान देगी।
राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम हरित विकास और स्वच्छ पर्यावरण के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने में तेजी लाएगा।
क्रमांक -2026
अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिए गठित होगा वैधानिक आयोग
हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026 को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 28 जुलाई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026 को मंजूरी प्रदान की गई।
इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके लिए उपलब्ध संवैधानिक एवं वैधानिक संरक्षणों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने तथा उनके सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन करना है।
आयोग में एक अध्यक्ष, पांच गैर-सरकारी सदस्य तथा सरकार द्वारा नियुक्त एक सचिव होगा। अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। विधेयक में उनके त्यागपत्र, पद से हटाने तथा रिक्त पदों को भरने संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।
आयोग अल्पसंख्यक समुदायों को प्राप्त संवैधानिक एवं वैधानिक संरक्षणों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा तथा उनके प्रभावी पालन के लिए सरकार को आवश्यक सुझाव देगा। इसके अतिरिक्त, आयोग अल्पसंख्यकों से संबंधित सरकारी नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की निगरानी करेगा, विभिन्न विषयों पर अध्ययन एवं अनुसंधान कराएगा, सरकारी सेवाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा तथा उनके कल्याण एवं विकास के लिए आवश्यक सिफारिशें करेगा। आयोग राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव एवं राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य करेगा। साथ ही, अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों एवं संरक्षणों से संबंधित शिकायतों की जांच कर संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला उठाएगा।
आयोग को अपने वैधानिक दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के लिए जांच के दौरान सिविल न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी। इसके अंतर्गत गवाहों को तलब करना एवं उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना, दस्तावेज प्रस्तुत कराने का निर्देश देना, शपथ-पत्रों के आधार पर साक्ष्य स्वीकार करना, सार्वजनिक अभिलेखों को तलब करना तथा गवाहों एवं दस्तावेजों की जांच के लिए आयोग जारी करने जैसी शक्तियां शामिल होंगी।
विधेयक में आयोग के लिए सचिव एवं आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति, वार्षिक बजट तैयार करने, सरकार से अनुदान प्राप्त करने, लेखों का रखरखाव एवं लेखा-परीक्षा कराने तथा सरकार को वार्षिक एवं विशेष प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान भी किया गया है। इन प्रतिवेदनों को राज्य विधानमंडल के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आयोग की सिफारिश पर सरकार को आयोग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए पुस्तकालय, सूचना प्रकोष्ठ, अनुसंधान प्रकोष्ठ तथा अन्य विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का अधिकार भी होगा।
क्रमांक 2026
सशस्त्र बल एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के तीन शहीदों के आश्रितों को ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी
चंडीगढ़, 28 जुलाई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में युद्ध में शहीद हुए जवानों के परिवारों के कल्याण एवं पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए हरियाणा निवासी शहीद जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने संबंधी राज्य सरकार की नीति के प्रावधानों में राहत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
यह निर्णय हरियाणा सरकार की 30 मई, 2014 को अधिसूचित अनुकंपा नियुक्ति नीति तथा वर्ष 2014 और 2018 में किए गए संशोधनों के तहत लिया गया है। इस नीति के अनुसार हरियाणा के शहीद सशस्त्र बल एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के पात्र आश्रितों को शहीद की रैंक के अनुसार ग्रुप-बी, ग्रुप-सी अथवा ग्रुप-डी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान है।
मंत्रिमंडल ने ऐसे तीन मामलों में निर्धारित समय-सीमा में छूट देने को मंजूरी दी, जिनमें शहीद जवानों के पुत्र एवं पुत्रियां अपने माता-पिता की शहादत के समय नाबालिग थे। वयस्क होने के बाद तीनों आवेदकों ने छह माह के भीतर ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। चूंकि ये मामले पूर्व नीति में निर्धारित समय-सीमा से बाहर थे, इसलिए नीति के संबंधित प्रावधानों के तहत इनमें समय-सीमा में छूट देने को मंजूरी दी गई।
लाभार्थियों में करनाल निवासी स्वर्गीय एसडब्ल्यूआर श्री सुल्तान सिंह (भारतीय सेना) के पुत्र हर्ष, सीआरपीएफ के सिपाही भिवानी निवासी स्वर्गीय श्री प्रदीप कुमार की पुत्री खुशबू तथा श्री संदीप कुमार के पुत्र योगेश शामिल हैं। तीनों अपने माता-पिता की शहादत के समय नाबालिग थे और वयस्क होने के बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब तीनों को ग्रुप-सी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा।
अनुकंपा नियुक्ति नीति में वर्ष 2023 में कुछ संशोधनों के साथ बदलाव किए गए थे। हालांकि, संशोधित नीति में यह भी स्पष्ट किया गया कि पुराने मामलों का निपटारा उसी नीति के अनुसार किया जाएगा, जो उस समय लागू थी।
यह निर्णय देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों के परिवारों के प्रति हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरकार उनके पात्र आश्रितों के समय पर पुनर्वास एवं सहयोग सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
क्रमांक-2026
भवनों तथा भूमि पर संपत्ति कर लगाने की एक नई पद्धति लागू
चंडीगढ़, 28 जुलाई - मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में नगर निगमों, नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं की सीमा के भीतर भवनों तथा भूमि पर संपत्ति कर लगाने की एक नई, सरलीकृत एवं पारदर्शी पद्धति को सैद्धांतिक (ULBs ) स्वीकृति प्रदान की गई।
यह नई पद्धति हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के अंतर्गत नगर निगमों के लिए तथा हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 के अंतर्गत नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए अलग-अलग अधिसूचित की जाएगी, और वर्ष 2013 की संपत्ति कर अधिसूचनाओं के स्थान पर लागू होगी। इससे राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में मूल्यांकन की एक समान, सूत्र-आधारित प्रणाली लागू होगी।
पारदर्शिता एवं अनुपालन में सुगमता की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, नई प्रणाली में विवेकाधीन एवं जटिल मूल्यांकन प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूंजीगत मूल्य की गणना हेतु एक स्पष्ट, सूत्र-आधारित पद्धति अपनाई गई है कृ जो प्लॉट क्षेत्र अथवा कारपेट क्षेत्र, लागू कलेक्टर दर, तथा फ्लोर फैक्टर पर आधारित है।
शहरों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है - नगर निगमों के लिए ए1 एवं ए2, तथा नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं के लिए बी एवं सी तथा प्रत्येक श्रेणी के लिए न्यूनतम एवं अधिकतम कर दरें निर्धारित की गई हैं। इससे संपत्ति मालिकों के लिए अधिक पूर्वानुमेयता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, जबकि नगर निकायों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर दरें तय करने की लचीलापन प्राप्त होगी।
नई पद्धति में एक उपयोग-आधारित गुणन कारक भी शामिल किया गया है, जो संपत्ति के आकार एवं उपयोग की प्रकृति - आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत अथवा विशेष श्रेणी के आधार पर कर देयता को जोड़ता है, जिससे कर का बोझ समान एवं आनुपातिक बना रहे। संपत्ति मालिकों को अचानक वृद्धि से बचाने हेतु, नई प्रणाली के तहत कर देयता में वृद्धि को सीमित किया गया है तथा पूर्ण संशोधित मूल्यांकित मूल्य तक पहुंचने तक इसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा।
व्यापक छूट जनहित को ध्यान में रखते हुए, नई नीति में संपत्ति कर से व्यापक छूट का प्रावधान किया गया है। प्रमुख छूटों में शामिल हैं :
-धार्मिक संपत्तियां, जिनमें मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे एवं मस्जिदें शामिल हैं, जो जनता को निःशुल्क सेवाएं प्रदान करती हैं – 100% छूट।
-पट्टे या किराए पर न दी गई नगरपालिका संपत्तियां।
-अनाथालय, वृद्धाश्रम, श्मशान एवं कब्रिस्तान तथा धर्मशालाएं।
-सरकारी शैक्षणिक संस्थान एवं सरकारी अस्पताल।
- विशुद्ध रूप से कृषि प्रयोजनों हेतु उपयोग की जाने वाली संपत्तियां।
- सभी गौशालाएं (दूध, डेयरी उत्पाद, जैविक उर्वरक, बायो-सीएनजी/ध्बायोगैस, गोबर एवं गोमूत्र की बिक्री के अतिरिक्त किसी व्यावसायिक प्रयोजन हेतु प्रयुक्त भाग को छोड़कर)।
-सेवारत / भूतपूर्व सैनिकों एवं अर्धसैनिक बल कार्मिकों तथा शहीद सैनिकों के परिवारों के स्व-अधिवासित आवासीय मकान (250 वर्ग मीटर तक)।
-स्वतंत्रता सेनानियों, उनके जीवनसाथी एवं युद्ध विधवाओं के स्व-अधिवासित आवासीय मकान।
- धर्मार्थ शैक्षणिक संस्थान, धर्मार्थ अस्पताल, तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) हेतु विद्यालय।
- नगरपालिका सीमा में नव-सम्मिलित गांवों के लाल डोरा क्षेत्र में स्थित आवासीय संपत्तियां, सम्मिलन की तिथि से पांच वर्षों तक (अधिकतम तीन मंजिल तक)।
- निःशुल्क अथवा अवैतनिक पार्किंग इकाइयां।
*अनुपालन एवं सामाजिक कल्याण को प्रोत्साहित करने हेतु छूट*
नई पद्धति में समय पर अनुपालन को पुरस्कृत करने तथा सामाजिक कल्याण उद्देश्यों को समर्थन देने हेतु एक संरचित छूट ढांचा भी शामिल किया गया है। प्रमुख छूट इस प्रकार हैं :
-नगरपालिका सीमा में स्थित मौजूदा गांवों के लाल डोरा क्षेत्र की आवासीय संपत्तियों पर संपत्ति कर में 75 % छूट
- प्रति संपत्ति अधिकतम 25 % तक संयुक्त छूट, जिसमें शामिल है .
-चालू आकलन वर्ष के 30 अप्रैल तक बकाया राशि सहित सभी देय राशियों का भुगतान करने पर 10 % छूट .
- लगातार 3 पूर्ववर्ती वर्षों तक समय पर कर भुगतान करने वाले अच्छे करदाताओं को 5 % छूट
- महिलाओं के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 25 % छूट (संयुक्त स्वामित्व की स्थिति में आनुपातिक)।
-दिव्यांग व्यक्तियों (40% या अधिक दिव्यांगता) के स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों पर 10% छूट
- पूर्ण रूप से क्रियाशील शून्य-अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली वाले ग्रुप हाउसिंग सोसायटी / प्रॉपर्टी क्लस्टर हेतु 10 % छूट .
इन छूटों का उद्देश्य समय पर भुगतान, पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं तथा समावेशी स्वामित्व को प्रोत्साहित करना है।
*संपत्ति मालिकों के लिए सुगम लेन-देन*
सुगम लेन-देन सुनिश्चित करने हेतु, संपत्ति मालिकों के पास नई अधिसूचना की तिथि से एक माह तक पुरानी वर्ष 2013 अधिसूचना के अनुसार कर भुगतान का विकल्प रहेगा, जिसके पश्चात संशोधित प्रणाली लागू होगी। जिन संपत्ति मालिकों ने पहले ही अपना बकाया चुका दिया है, उन पर इस नई अधिसूचना का वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं उससे पूर्व के बकाया एवं ब्याज पर कोई असर नहीं होगा।
यह ऐतिहासिक सुधार हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समतापूर्ण एवं नागरिक-अनुकूल बनाने के साथ-साथ बेहतर नागरिक सेवाओं एवं अवसंरचना के वित्तपोषण हेतु नगर निकायों के राजस्व आधार को सुदृढ़ करेगा।
क्रमांक-2026
हरियाणा मंत्रिमंडल ने नगर निकाय क्षेत्रों में आवासीय प्लॉटेड आवास के लिए टाउन प्लानिंग योजना को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 28 जुलाई - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नगर निकाय क्षेत्रों में, जहां नियंत्रित क्षेत्र के प्रावधान लागू नहीं हैं, आवासीय प्लॉटेड आवास हेतु नई टाउन प्लानिंग योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना का उद्देश्य ऐसे नगर निकाय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं विनियमित आवासीय विकास सुनिश्चित करना है।
स्वीकृत योजना के अनुसार, आवासीय प्लॉटेड आवास परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 5 एकड़ भूमि आवश्यक होगी, जबकि अधिकतम क्षेत्रफल की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परियोजना स्थल तक पहुंचने के लिए मौजूदा सड़क होनी चाहिए, जिसकी चौड़ाई कम से कम 33 फुट हो। योजना के तहत आवासीय प्लॉटों का आकार 50 वर्गमीटर से 250 वर्गमीटर के बीच होगा। साथ ही प्रत्येक परियोजना में कम से कम 50 प्रतिशत आवासीय प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि किफायती आवास को बढ़ावा मिल सके। योजना के अनुसार, परियोजना क्षेत्र के अधिकतम 65 प्रतिशत हिस्से का उपयोग आवासीय एवं वाणिज्यिक प्लॉटों के लिए किया जा सकेगा, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्र का हिस्सा अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। इसके अतिरिक्त, परियोजना के भीतर सभी आंतरिक सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई 10 मीटर निर्धारित की गई है।
स्वीकृत प्रावधानों के तहत, डेवलपर्स को हरियाणा शहरी अवसंरचना विकास बोर्ड (एचयूआईडीबी) के मुख्य प्रशासक को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्क्रूटनी शुल्क जमा कराना होगा। इसके अलावा, उन्हें लो-पोटेंशियल जोन में आवासीय उपयोग के लिए लागू परिवर्तन शुल्क (Conversion Charges) का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसके साथ ही, डेवलपर्स को प्रचलित बाह्य विकास शुल्क ( External Development Charges ) का 25 प्रतिशत विकास शुल्क के रूप में एचयूआईडीबी को देना होगा। यह दर नगर समितियों और नगर परिषदों दोनों में समान रूप से लागू होगी।
नई योजना राज्य में आवासीय विकास के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराने, अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने, आवास क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा अनधिकृत कॉलोनियों की बढ़ौतरी में काफी कमी आएगी।
क्रमांक-2026
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