कुरुक्षेत्र 21 अगस्त डीजीपी चंडीगढ़ डा. सागर प्रीत ने कहा कि युवाओं को नशे, इमीग्रेशन एजेंट और गैंग से बचाने के लिए समाज के लोगों को अपनी भागीदारी दिखानी होगी और युवाओं को पढ़ाई व खेलों के तरफ लेकर जाने की जरूरत है। अक्टूबर माह से जींद जिला के प्रत्येक गांव तक युवाओं को जागरूक करने के लिए 80 जगहों पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीणों को जागरूक करके गांव में ई-लाइब्रेरी, खेल मैदान तैयार करवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
डीजीपी चंडीगढ़ डा. सागर प्रीत देर सायं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कार्यालय आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। डीजीपी चंडीगढ़ डा. सागर प्रीत का केडीबी कार्यालय में पहुंचने पर एडीसी वीरेंद्र चौधरी द्वारा पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि अब उन्होंने युवाओं को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। प्रदेश में सबसे पहले जींद जिला की शुरूआत की जाएगी। जींद जिला को 80 हिस्सों में बांटा गया है। इनमें 5-5 गांवों को एक स्थान पर जोड़ा गया है। सभी गांवों से 5 नागरिकों को एक स्थान पर इक_ा करके समझाया जाएगा। युवाओं को आगे बढ़ने के लिए स्कील, संबंधित फील्ड की जानकारी विशेषज्ञों से उपलब्ध करवाई जाएगी।
डीजीपी डा. सागर प्रीत ने कहा कि सरकार के पास सरकारी नौकरी के पद सीमित है। उन पदों से ज्यादा युवाओं को सरकार द्वारा नौकरी नहीं दे सकती है। युवाओं के पास कॉलेज के बाद रोजगार नहीं हुआ और कोई स्कीम नहीं हुई तो वो बेरोजगारी में नशा की तरफ चले जाते हैं या पैसा की चाह में किसी गैंग को ज्वाइन कर लेते हैं। इससे युवा गलत दिशा में चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को समझाना होगा कि वो गलत दिशा में जाकर और शॉर्टकट तरीके से पैसा कमाने की ना सोचें। लीगल तरीके से चलकर आगे बढ़ाना ही सही होगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा-पंजाब के ज्यादातर युवा विदेश जाने की चाह में इमीग्रेशन एजेंटों के जालों में फंस जाते हैं। ये एजेंट इन्हें डोंकी रुट के माध्यम से भेजकर परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और कानून एक दायरे तक अपनी कार्रवाई कर पाते हैं। इस व्यवस्था को पूरी तरह रोकने के लिए सामाजिक भागीदारी जरूरी है। समाज के पढ़े लिखे नागरिकों का दायित्व बनता है कि वो युवाओं को मिसगाइड व चिट से बचाया जा सके।
डीजीपी डा. सागर प्रीत ने कहा कि युवाओं को विदेश जाने के लिए खुद प्रयास करना चाहिए। वो जब पासपोर्ट बनवाएं तो ऑनलाइन आवेदन खुद कर सकते हैं, जिसकी प्रक्रिया बहुत ही सरल है। इसके बाद वीजा लगवाने के लिए एंबेसी से संपर्क करना चाहिए। यदि विदेश में जॉब की है तो उसकी जानकारी संबंधित देश के हेल्पलाइन से जानकारी ली जा सकती है। जब युवाओं को इस बारे में जानकारी होती तो वो किसी भी प्रकार की ठगी का शिकार नहीं होंगे और अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। कार्यक्रम में एडीसी वीरेंद्र चौधरी, चेयरमैन रविंद्र सांगवान, उपाध्यक्ष देवी दयाल, गीता जयंती मेला प्राधिकरण सदस्य सौरभ चौधरी, आरटीए इंस्पेक्टर जोगिंदर ढुल ने भी अपने-अपने विचार साझा किए।
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