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ऋण व सब्सिडी से स्वरोजगार की राह पर बढ़े परिवार

छोटे कारोबार ने दी नियमित आमदनी, मेहनत और हुनर से बदली आर्थिक तस्वीर

Posted On: 30 Sep 2026 6:14PM


फतेहाबाद, 30 सितंबर। किसी के लिए कंप्यूटर की दुकान रोजगार का जरिया बनी तो किसी ने मनियारी और किराना की दुकान से अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने का रास्ता बनाया। शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हुई, लेकिन आर्थिक सहायता, मेहनत और अपने हुनर के बूते इन लोगों ने स्वरोजगार को आमदनी के स्थायी साधन में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

फतेहाबाद जिले में हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ऋण एवं सब्सिडी योजनाओं से लाभान्वित ऐसे परिवारों की कहानियां बताती हैं कि आर्थिक सहायता केवल पूंजी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सही उपयोग होने पर यह व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर भी देती है। निगम की योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है।


कंप्यूटर की दुकान बनी शकुंतला देवी की नई पहचान

गांव मताना की शकुंतला देवी पत्नी राम सिंह के लिए स्वरोजगार की शुरुआत कंप्यूटर की दुकान से हुई। उन्होंने हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम टर्म लोन स्कीम के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त कर पीसी/कंप्यूटर की दुकान शुरू की।

कुल 2 लाख रुपये की परियोजना लागत में 1 लाख 26 हजार रुपये अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ऋण अंश तथा 50 हजार रुपये की सब्सिडी शामिल थी। दुकान शुरू होने के बाद शकुंतला देवी ने इसे अपने परिवार की आय का नियमित माध्यम बना लिया है। वर्तमान में उन्हें करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है।

शकुंतला देवी के लिए यह केवल एक दुकान शुरू करने की बात नहीं है। उनका कहना है कि आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने स्तर पर काम शुरू करने का भरोसा दिया। आज वे अपने व्यवसाय को संभाल रही हैं और अपनी आमदनी से परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान दे रही हैं।


संजय कुमार ने कंप्यूटर व्यवसाय में तलाशा रोजगार का रास्ता

सनियाना गांव के संजय कुमार पुत्र सुल्तान सिंह ने भी कंप्यूटर से जुड़े काम को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम टर्म लोन स्कीम के तहत मिली सहायता से उन्होंने पीसी/कंप्यूटर की दुकान शुरू की।

उनकी परियोजना की लागत 2 लाख रुपये थी, जिसमें 1 लाख 26 हजार रुपये ऋण अंश और 50 हजार रुपये सब्सिडी शामिल थी। दुकान शुरू करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाया। वर्तमान में व्यवसाय से उन्हें लगभग 14 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त हो रही है।

संजय कुमार बताते हैं कि पहले अपना काम शुरू करने के लिए पूंजी जुटाना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। योजना के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्हें वह अवसर मिला, जिसकी मदद से वे नौकरी की तलाश के बजाय स्वयं रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ सके। उनके अनुसार, अब उनकी दुकान परिवार की आय में नियमित योगदान कर रही है।


सुमन के लिए मनियारी की दुकान बनी आय का सहारा

समैन गांव की सुमन पत्नी मंजीत ने अपने लिए ऐसा व्यवसाय चुना, जिसे स्थानीय जरूरतों से जोड़ा जा सके। उन्होंने हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम टर्म लोन स्कीम के तहत आर्थिक सहायता लेकर मनियारी की दुकान शुरू की।

2 लाख रुपये की परियोजना में 1 लाख 26 हजार रुपये निगम का ऋण अंश और 50 हजार रुपये अनुदान राशि शामिल थी। दुकान शुरू होने के बाद सुमन ने इसे लगातार संचालित किया और अब इससे उन्हें लगभग 15,500 रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है।

सुमन के लिए इस व्यवसाय की खास बात यह है कि इससे उन्हें अपने गांव में रहते हुए आय अर्जित करने का अवसर मिला। उनका कहना है कि दुकान की आमदनी से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और आर्थिक मामलों में परिवार पर निर्भरता भी कम हुई है। उनके अनुसार, स्वरोजगार ने उन्हें यह विश्वास दिया कि उचित अवसर और मेहनत के साथ वे स्वयं भी परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।


किराना दुकान से दलजीत सिंह ने खड़ा किया अपना कारोबार

कन्हड़ी गांव के दलजीत सिंह पुत्र ईश्वर सिंह ने अपनी आजीविका के लिए किराना व्यवसाय को चुना। उन्होंने हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की टर्म लोन स्कीम का लाभ लेकर 2 लाख रुपये की परियोजना लागत से किराना दुकान शुरू की।

परियोजना में 1 लाख 26 हजार रुपये ऋण अंश और 50 हजार रुपये सब्सिडी शामिल थी। दुकान शुरू होने के बाद दलजीत सिंह ने नियमित रूप से व्यवसाय पर ध्यान दिया और इसे अपनी आमदनी का साधन बनाया। वर्तमान में उन्हें इससे करीब 14,500 रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है।

दलजीत सिंह के लिए अपनी दुकान का महत्व सिर्फ मासिक कमाई तक सीमित नहीं है। वे बताते हैं कि अपना व्यवसाय होने से उन्हें काम के लिए किसी दूसरे स्थान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। स्थानीय स्तर पर दुकान चलाने से परिवार की जरूरतों के लिए नियमित आय का सहारा मिला है और भविष्य में कारोबार को और बढ़ाने की उम्मीद भी बनी है।


विभाग की आर्थिक सहायता से शुरू हुआ सफर, मेहनत ने दी मजबूती : जिला प्रबंधक

हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के जिला प्रबंधक कुलदीप सिंह ने बताया कि इन परिवारों को छोटे व्यवसायों से मिलने वाली नियमित आय ने परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद देने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाया है। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की ऐसी योजनाओं का उद्देश्य पात्र लोगों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। फतेहाबाद के इन लाभार्थियों के अनुभव इस बात को सामने लाते हैं कि जब आर्थिक सहायता को हुनर, स्थानीय जरूरत और मेहनत के साथ जोड़ा जाता है, तो छोटा कारोबार भी परिवार के लिए आय का मजबूत आधार बन सकता है।

फोटो: लाभार्थी शकुंतला, संजय कुमार, सुमन व दलजीत सिंह।

 

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(Release ID: 8066)