Agriculture and farmer welfare
azadi ka amrit mahotsav

पराली प्रबंधन में लापरवाही नहीं, किसानों को तकनीकी जानकारी देकर करें जागरूक : डीसी

पराली खेत में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि, पंचायतों व जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने के निर्देश

Posted On: 03 Oct 2026 1:27PM
- फील्ड मॉनिटरिंग और क्विक रेस्पॉन्स टीमों को रखें सक्रिय, जरूरत के अनुसार ड्रोन से भी होगी निगरानी
झज्जर, 03 अक्टूबर।
 जिला में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने, फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और वायु गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर जिला प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक एवं वैकल्पिक तकनीकों की जानकारी देते हुए पराली न जलाने के लिए निरंतर प्रेरित किया जाए।
डीसी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के साथ-साथ फील्ड में नियमित निगरानी की जाए। पराली जलाने की संभावित घटनाओं की तत्काल सूचना और प्रभावी कार्रवाई के लिए क्विक रेस्पॉन्स टीमें सक्रिय रहें। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है, इसलिए किसानों को इसके दुष्प्रभावों और फसल अवशेष प्रबंधन के लाभों के बारे में समझाना जरूरी है।
फील्ड विजिट के साथ अधिकारी संभावित क्षेत्रों पर रखें नजर
डीसी ने संबंधित अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने तथा पराली जलाने की आशंका वाले क्षेत्रों में पहले से प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। प्रदूषण फैलाने वाले संभावित स्रोतों की निगरानी के लिए आवश्यकता अनुसार ड्रोन का उपयोग करने और सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा। उन्होंने भुवन एप और सीआरएम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया।
पराली प्रबंधन अपनाने पर प्रति एकड़ 1200 रुपये प्रोत्साहन
डीसी ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पराली को खेत में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना के साथ-साथ फसल अवशेष प्रबंधन की उपलब्ध मशीनरी एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी भी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए।
उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी पराली प्रबंधन अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। किसानों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उन्हें पराली प्रबंधन के पर्यावरणीय और कृषि संबंधी लाभों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों के सहयोग से ही बनेगा स्वच्छ पर्यावरण
डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ किसानों और आमजन का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को न जलाएं तथा उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें।
----------------
फोटो कैप्शन: डीसी वर्षा खांगवाल।
--------------

 

*****

 


(Release ID: 8328)