झज्जर, 03 अक्टूबर
हर गांव में कुछ ऐसे सपने होते हैं, जिन्हें पूरा करने की चाह तो होती है, लेकिन संसाधनों की कमी कई बार उन सपनों की राह रोक देती है। कोई युवा सरकारी नौकरी का सपना देखता है, कोई प्रतियोगी परीक्षा पास कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलना चाहता है, तो कोई बेटी अपने गांव से ही आगे बढ़कर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती है। गांव कलोई में स्थापित अटल लाइब्रेरी ऐसे ही सपनों को पूरा करने की दिशा में एक मजबूत आधार बन रही है।
जहां कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को करीब 7 किलोमीटर दूर झज्जर या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब पढ़ाई के बेहतर संसाधन उनके अपने गांव में उपलब्ध हैं। अटल लाइब्रेरी ने युवाओं के लिए न केवल किताबों का दरवाजा खोला है, बल्कि उनके सपनों और संभावनाओं के लिए भी नई राह तैयार की है।
किताबों के साथ मिला विश्वास, गांव में ही तैयार हो रहा भविष्य
गांव कलोई की आबादी लगभग 2,666 है और साक्षरता दर 82.95 प्रतिशत है। गांव में प्रतिभा और मेहनत की कमी नहीं थी, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयुक्त वातावरण और अध्ययन संसाधनों का अभाव जरूर था।
शहर जाकर पढ़ाई करने में आने-जाने का समय, आर्थिक खर्च और अन्य व्यावहारिक परेशानियां युवाओं के सामने चुनौती बनी रहती थीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह चुनौती और बड़ी थी। कई बार प्रतिभाशाली युवा केवल संसाधनों के अभाव में अपनी तैयारी को उस स्तर तक नहीं ले जा पाते थे, जिसकी उन्हें जरूरत थी। अटल लाइब्रेरी ने इसी चुनौती को अवसर में बदलने का काम किया है।
गांव की बेटियों के सपनों को भी मिली नई राह
इस पहल का सबसे भावनात्मक पक्ष गांव की बेटियों के लिए पैदा हुआ अवसर है। दूर शहरों में जाकर पढ़ाई करना हर परिवार के लिए सहज नहीं होता था। सुरक्षा, आने-जाने और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई बेटियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर सीमित हो जाते थे।
एक भवन बदला, तो बदल गई पढ़ाई की तस्वीर
विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा सरकार के अंतर्गत वर्ष 2025 में गांव कलोई के सामुदायिक केंद्र के साथ निर्मित भवन में अटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई। योजना की विशेषता यह रही कि उपलब्ध भवन एवं संसाधनों का उपयोग करते हुए उसे आधुनिक अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया गया।
लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें एवं अध्ययन सामग्री, विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर और बैठने की व्यवस्था तथा वातानुकूलित अध्ययन कक्ष उपलब्ध कराया गया है।
इस सुविधा ने एक साधारण भवन को ऐसे स्थान में बदल दिया है, जहां प्रतिदिन युवा अपनी किताबें खोलकर अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं। किसी के हाथ में सरकारी नौकरी की तैयारी की पुस्तक है, तो किसी की आंखों में अपने परिवार के बेहतर भविष्य का सपना—और इन सपनों को दिशा देने के लिए अब गांव में ही एक स्थान मौजूद है।
सामुदायिक भागीदारी से मजबूत हो रही सफलता की नींव
अटल लाइब्रेरी के संचालन और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। इसमें सरपंच, ग्राम सचिव, स्थानीय शिक्षाविदों और युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
पुस्तकालय के रखरखाव, अनुशासन और विद्यार्थियों से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी में ग्रामीणों की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह सुविधा केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक जिम्मेदारी और उम्मीद का केंद्र भी बन रही है।
अटल लाइब्रेरी बनी ‘गांव से सफलता तक’ का रास्ता
हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश की ग्राम पंचायतों में अटल ई-लाइब्रेरी स्थापित करने की योजना ग्रामीण युवाओं को उनके घर के नजदीक अध्ययन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रदेश में अब तक 22 जिलों में 996 अटल पुस्तकालय स्थापित किए जा चुके हैं।गांव कलोई की अटल लाइब्रेरी इसी बदलाव की एक जीवंत तस्वीर है।ग्रामीणों को दिखाई दे रही बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद
आज कलोई का युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए शहर जाने की मजबूरी से आगे बढ़कर अपने ही गांव में बैठकर अपने भविष्य की नींव रख रहा है। गांव की बेटियां भी अपने सपनों को सुरक्षित वातावरण में आकार दे रही हैं और परिवारों को अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई दे रही है।अटल लाइब्रेरी कलोई में एक पुस्तकालय से कहीं बढ़कर है यह उन आंखों में उम्मीद जगा रही है, जो अपने गांव से निकलकर सफलता की नई कहानी लिखने का सपना देखती हैं। यह उस बदलाव की शुरुआत है, जहां गांव की प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए गांव छोड़ना जरूरी नहीं, बल्कि गांव में ही अवसर मिलना संभव है।
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फ़ोटो। गांव कलोई स्थित अटल लाइब्रेरी में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी।
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