रोहतक, 10 अक्टूबर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिला रोहतक में खरीफ फसलों के फसल कटाई प्रयोगों का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है। उपायुक्त सतबीर सिंह तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक के मार्गदर्शन में संचालित इस कार्य के तहत फसल कटाई प्रयोगों की गुणवत्ता और आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इसी कड़ी में निदेशालय पंचकूला के निर्देशानुसार उपनिदेशक (सांख्यिकी) डॉ. सरबजीत सिंह ने अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान जिला के विभिन्न गांवों में पहुंचकर फसल कटाई प्रयोगों का निरीक्षण किया। कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक द्वारा फील्ड स्टाफ की ड्यूटी निर्धारित की गई है, ताकि सभी प्रयोग निर्धारित मानकों के अनुसार समय पर पूरे किए जा सकें।
निरीक्षण के दौरान डॉ. सरबजीत सिंह ने सांपला खंड के गांव नौनंद व कारोर, रोहतक खंड के गांव मकड़ौली कलां व कुताना, लाखन माजरा खंड के गांव लाखन माजरा व सासरौली, कलानौर खंड के गांव माडौधी जाटान व कलानौर तथा महम खंड के गांव सीसर व खरकड़ा का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पांच गुणा पांच मीटर क्षेत्र में फसल कटाई प्रयोग करवाकर उत्पादकता का आकलन भी किया। उन्होंने फील्ड में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे फसल कटाई प्रयोगों को पूरी गंभीरता और सावधानी के साथ संपन्न करें। प्रयोग के दौरान निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों का पालन किया जाए, ताकि फसलों की औसत पैदावार के आंकड़ों में पूर्ण शुद्धता बनी रहे।
डॉ. सरबजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ सीजन में धान, कपास, बाजरा और मक्का की फसलों के लिए प्रत्येक गांव में प्रत्येक बीमित फसल के चार-चार फसल कटाई प्रयोग करना अनिवार्य है। धान की फसल में स्मार्ट सैंपलिंग तथा अन्य फसलों में रेंडम नंबर प्रणाली के आधार पर खेतों का चयन किया जाता है। इस प्रक्रिया में संबंधित पटवारी की सहायता भी ली जाती है। फसल कटाई प्रयोग के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों तथा संबंधित किसान की उपस्थिति में औसत पैदावार का आकलन किया जाता है। गांव स्तर पर एकत्रित आंकड़ों को ब्लॉक एवं जिला स्तर पर संकलित करने के बाद निदेशालय पंचकूला भेजा जाता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर फसल की उत्पादकता का निर्धारण तथा योजना के प्रावधानों के अनुसार किसानों के मुआवजे की गणना की जाती है।
डॉ. सरबजीत सिंह ने कहा कि सभी फसल कटाई प्रयोगों को मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य है। इससे मौके पर ही आंकड़े अपलोड किए जा सकेंगे तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी। इस अवसर पर कृषि विभाग के सहायक सांख्यिकी अधिकारी विनोद हुड्डा, बीमा कंपनी के जिला प्रतिनिधि सचिन मिश्रा व सोनू सहित कृषि विभाग के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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