कैथल, 13 अक्टूबर। डीसी अपराजिता ने बताया कि जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद लगातार जारी है। 12 अक्टूबर तक जिले की मंडियों में कुल 2 लाख 77 हजार 268 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जबकि 1 लाख 4 हजार 981 मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने और उठान में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने बताया कि खरीद एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अब तक 1,39,301 मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जिसमें से 51,880 मीट्रिक टन का उठान किया जा चुका है । इसी प्रकार हैफेड ने 91,907 मीट्रिक टन धान खरीदा है और 36,321 मीट्रिक टन का उठान किया है। हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 46,060 मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जिसमें से 16,780 मीट्रिक टन का उठान हुआ है।
मंडियों एवं खरीद केंद्रों के अनुसार, ढांड मंडी में सर्वाधिक 44,131 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। इसके बाद कैथल की अतिरिक्त मंडी में 38,704 मीट्रिक टन, गुहला चीका की नई मंडी में 38,048 मीट्रिक टन तथा पूंडरी मंडी में 35,717 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की गई है।
अन्य मंडियों में अरनौली में 3,453 मीट्रिक टन, भागल में 3,309 मीट्रिक टन, धनौरी में 173 मीट्रिक टन, गुहला चीका की पुरानी मंडी में 20,317 मीट्रिक टन, कैथल की पुरानी मंडी में 3,485 मीट्रिक टन तथा कैथल की नई मंडी में 28,854 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है।
इसी प्रकार कलायत मंडी में 7,139 मीट्रिक टन, कांगथली में 2,142 मीट्रिक टन, कौल में 5,432 मीट्रिक टन, पाई में 6,464 मीट्रिक टन, राजौंद में 3,280 मीट्रिक टन, रामथली में 8,369 मीट्रिक टन तथा सीवन मंडी में 10,750 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है।
चीका में बाबू राम राइस मिल के सामने स्थित खरीद केंद्र पर 979 मीट्रिक टन और गंगोत्री मार्बल के सामने स्थित केंद्र पर 6,093 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है। वहीं, अदानी एग्रो साइलो, ढांड के पार्किंग लैंड में 10,429 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की गई है।
डीसी अपराजिता ने खरीद एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया सुचारू बनाए रखने तथा मंडियों से खरीदे गए धान का समय पर उठान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि किसानों को मंडियों में आवश्यक सुविधाएं मिलें और फसल की खरीद एवं उठान में अनावश्यक देरी न हो।
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