azadi ka amrit mahotsav

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और तार्किक चिंतन विकसित करने के लिए गतिविधियों तथा प्रयोगों पर आधारित शिक्षण पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण : अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनन्द

पलवल में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान शिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

- अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनन्द ने किया प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ

- विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना विकसित करने पर दिया जोर

Posted On: 22 Oct 2026 4:49PM

पलवल, 22 अक्टूबर।
पलवल जिला में विद्यार्थियों को विज्ञान की बेहतर शिक्षा प्रदान करने और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से लगभग तीन दर्जन विज्ञान शिक्षकों का दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, सीमेंस इंडिया तथा सीमेंस स्टिफ्टुंग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘नवाचार के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित शिक्षा : एक्सपेरिमेंटो इंडिया’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण का शुभारंभ अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनन्द ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुडा सेक्टर-2 स्थित टैगोर पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पलवल में किया जा रहा है। इसमें जिले के 36 विज्ञान शिक्षक भाग ले रहे हैं।

अतिरिक्त उपायुक्त ने शिक्षकों से किया संवाद
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनन्द ने शिक्षकों से संवाद किया और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में विज्ञान शिक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और तार्किक चिंतन विकसित करने के लिए गतिविधियों तथा प्रयोगों पर आधारित शिक्षण पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां विद्यार्थी स्वतंत्र रूप से प्रश्न पूछ सकें, विभिन्न घटनाओं का अवलोकन कर सकें और स्वयं प्रयोग करके नई जानकारियां प्राप्त कर सकें। इससे विद्यार्थियों में स्वयं सीखने की प्रवृत्ति विकसित होगी और वे वैज्ञानिक अवधारणाओं को अधिक सरलता से समझ सकेंगे।

अतिरिक्त उपायुक्त ने शिक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का विद्यालयों में प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने पर विद्यार्थियों की विषय में रुचि बढ़ेगी। साथ ही, उनमें समस्याओं का समाधान खोजने, रचनात्मक ढंग से सोचने और समूह में मिलकर कार्य करने की क्षमता का विकास होगा।

छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों में विकसित होगी वैज्ञानिक सोच
‘एक्सपेरिमेंटो इंडिया’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित विषयों के प्रति रुचि विकसित करना है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, अवलोकन करने, तर्क के आधार पर निष्कर्ष निकालने और समूह में मिलकर समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है। इससे विद्यार्थी विज्ञान के सिद्धांतों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर समझ सकेंगे तथा उनमें नई चीजें सीखने और नवाचार करने की भावना विकसित होगी।

शिक्षकों को दिया जाएगा गतिविधियों और प्रयोगों पर आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को जिज्ञासा एवं खोज पर आधारित शिक्षण पद्धति, प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाने की तकनीक तथा विभिन्न विषयों से संबंधित पाठ योजनाओं के निर्माण की जानकारी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों को कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारित गतिविधियों, प्रयोगों, शिक्षण सामग्री और कक्षा में उनके प्रभावी उपयोग के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया जाएगा कि विज्ञान की कठिन अवधारणाओं को सरल गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचाया जाए। शिक्षकों को ऐसी शिक्षण विधियों से अवगत कराया जाएगा, जिनसे विद्यार्थी पढ़ाई में सक्रिय भागीदारी कर सकें और स्वयं प्रयोग करके सीखने के लिए प्रेरित हों। इसका उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को अधिक रोचक, सरल और प्रभावी बनाना है, ताकि विद्यार्थी वैज्ञानिक तथ्यों को केवल याद करने के बजाय उनके पीछे छिपे सिद्धांतों को भी समझ सकें।

विद्यालयों में नियमित रूप से होंगी विज्ञान संबंधी गतिविधियां
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संबंधित शिक्षकों से अपेक्षा की जाएगी कि वे अपने-अपने विद्यालयों में नियमित रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित से संबंधित गतिविधियों और प्रयोगों का आयोजन करें। इन गतिविधियों से विद्यार्थियों को विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझने और अपने आसपास होने वाली घटनाओं का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करने के अवसर मिलेंगे।

नियमित प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, समस्या समाधान तथा मिल-जुलकर कार्य करने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासाओं के आधार पर प्रश्न पूछने और उनके उत्तर खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, सीमेंस इंडिया तथा सीमेंस स्टिफ्टुंग के संयुक्त प्रयास से संचालित यह कार्यक्रम पलवल जिले में विज्ञान शिक्षण को गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इस प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की शिक्षण क्षमता को सुदृढ़ करने और विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना तथा उन्हें वैज्ञानिक सोच के साथ दैनिक जीवन की समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए सक्षम बनाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी संदीप कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी पलवल ओमप्रकाश तथा जिला निपुण समन्वयक संदीप तेवतिया भी उपस्थित रहे।
000

 

*****

 


(Release ID: 9765)