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किसान फसल अवशेषों में आग न लगाएं, बल्कि उनका उचित प्रबंधन करेंः एडीसी

Posted On: 23 Oct 2026 12:27PM
करनाल, 23 अक्तूबर। एडीसी डाॅ राहुल रईया ने बताया कि जिला में धान की फसल कटाई का कार्य अंतिम चरण में है। जिला प्रशासन द्वारा सरकार के निर्देशों की अनुपालना में फसल अवशेषों में आग लगाने पर पहले से ही पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। पराली जलाने पर भारत सरकार के निर्देशानुसार 2 एकड़ तक 5,000 रुपये, 5 एकड़ तक 10,000 रुपये और 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 30,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। आदेशों का उल्लंघन करने वाले दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम-1981 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अवशेषों में आग न लगाएं, बल्कि उनका उचित प्रबंधन करें।  
उन्होंने बताया कि आगजनी की घटनाओं की निगरानी के लिये सेटेलाइट व कई स्थानों पर ड्रोन द्वारा 24 घंटे निरंतर कार्य किया जा रहा है। यदि कोई किसान अपनी फसलों के अवशेष में आग लगाता है तो नियमानुसार उस पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना व एफआईआर के साथ-साथ रेड एन्ट्री का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि अगर कोई किसान फसल अवशेषों में आग लगाते हुए पाया जाता है तो वह दो वर्ष के लिये अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर नही करवा पाएगा, जिस कारण अगले दो वर्ष तक वह अपनी फसल मंडी में नहीं बेच पाएगा।
डीडीए डाॅ जसविंद्र सिंह ने बताया कि जिला में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए लगभग 400 बेलर सेट उपलब्ध हैं और एक्स-सीटू के तहत 550,000 मीट्रिक टन पराली की गांठों का प्रबंधन किया जाएगा। इसके अलावा किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक करने के लिए गांवों में जागरूकता शिविरों का आयोजन, लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रचार, स्कूली बच्चों द्वारा रैलियां और व्हाट्सएप समूहों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रशासनिक प्रयासों और किसानों के सहयोग से पिछले वर्षों की तुलना में आगजनी की घटनाओं में लगभग 76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, तथा खरीफ 2025 में केवल एक येलो जोन (गांव गगसीना) बचा है।  इस वर्ष जीरो बर्निंग के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगभग 800 अधिकारियों और कर्मचारियों की ग्राम स्तरीय समितियों/एनफोर्समेंट टीम कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।

 

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(Release ID: 9794)