*होडल, 24 अक्टूबर।*
जिला प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पलवल की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने और किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए शुक्रवार को उपायुक्त डा.जयेन्द्र सिंह छिल्लर के मार्गदर्शन में होडल खंड के गांव भिडूकी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एसडीएम होडल बैलीना ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत भिडूकी के सरपंच प्रतिनिधि भूपेंद्र जैलदार ने की। कार्यक्रम के दौरान किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया गया।
*पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति होती है प्रभावित*
एसडीएम बैलीना ने कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पराली जलाना पर्यावरण और कृषि भूमि दोनों के लिए नुकसानदायक है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और आमजन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय उपलब्ध कृषि यंत्रों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उनका उचित प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला प्रशासन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और किसानों के बीच आपसी समन्वय एवं सहयोग बेहद जरूरी है।
*50 छात्राएं कृषि सखी के रूप में करेंगी कार्य*
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यालय की 50 छात्राओं का कृषि सखी के रूप में कार्य करने का संकल्प रहा। छात्राओं ने कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। यह पहल को ग्रामीण स्तर पर कृषि संबंधी जागरूकता बढ़ाने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
*विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी*
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों ने किसानों को अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा फसल अवशेष प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि फसल अवशेषों का उचित उपयोग करने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। किसानों से आह्वान किया गया कि वे पराली जलाने से बचें और अन्य किसानों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
इस अवसर पर जिला के प्रगतिशील किसानों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टालों के माध्यम से किसानों को बीज, कृषि तकनीकों तथा अन्य उपयोगी कृषि जानकारियों से भी अवगत कराया गया।
अधिकारियों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित योजनाओं और तकनीकों की जानकारी देते हुए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करना तथा पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक डा. जगिर सिंह, उपमंडल कृषि अधिकारी डा. सुनील दत्त, सहायक कृषि अभियंता विजय कुमार, पशु विज्ञान केंद्र से डा. रेखा दहिया, सहायक गन्ना विकास अधिकारी डा. अरुण सोलंकी, खंड कृषि अधिकारी देवेंद्र कुमार एवं सुभाष चंद, खंड तकनीकी प्रबंधक रामदेव एवं सुंदर सिंह, विद्यालय प्राचार्य विष्णु गौड़, सहायक तकनीकी प्रबंधक अतुल शर्मा, धीरेन्द्र, बंसीलाल और घनश्याम सहित होडल खंड एवं अन्य खंडों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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