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सूरजकुंड दिवाली मेले में आकर्षण का केंद्र बनीं कलात्मक घडिय़ां, घर और कार्यालय की सजावट के लिए खूब हो रही खरीदारी

- विभिन्न आकारों और आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध घडिय़ां पर्यटकों को कर रहीं आकर्षित, पारंपरिक हस्तशिल्प को मिल रहा बढ़ावा

Posted On: 25 Oct 2026 7:10PM
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 25 अक्तूबर।
सूरजकुंड परिसर में आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेला-2026 में जहां बुनकरों और शिल्पकारों की कलाकृतियां तथा पारंपरिक परिधान पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं घरों और कार्यालयों की दीवारों की शोभा बढ़ाने वाली आकर्षक घडिय़ां भी लोगों की पसंद बनी हुई हैं। मेले में विभिन्न आकारों, डिजाइनों और कलात्मक स्वरूपों में उपलब्ध घडिय़ों को देखने और खरीदने के लिए पर्यटक स्टॉलों पर पहुंच रहे हैं। 

मेले में प्रदर्शित घडिय़ां अपनी आकर्षक बनावट और विविध डिजाइनों के कारण लोगों का ध्यान खींच रही हैं। घर की सजावट से लेकर कार्यालयों की दीवारों को सुंदर बनाने तक, इन घडिय़ों को उपयोगी और सजावटी वस्तु के रूप में पसंद किया जा रहा है। पर्यटक अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न डिजाइन वाली घडिय़ों का चयन कर रहे हैं। दिवाली के अवसर पर घरों को नया रूप देने और सजावट को खास बनाने के लिए भी ऐसी वस्तुओं की मांग रहती है।

सूरजकुंड दिवाली मेले में हस्तनिर्मित और सजावटी उत्पादों की विविधता पर्यटकों को खरीदारी के कई विकल्प उपलब्ध करा रही है। बुनकरों और शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद भारतीय कला एवं शिल्प परंपरा की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं। वहीं, सजावटी घडिय़ों जैसे उपयोगी उत्पाद मेले के बाजार को और विविधता प्रदान कर रहे हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेला-2026 स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। मेले में विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पादों के माध्यम से कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

मेले में विभिन्न स्टॉलों पर उपलब्ध उत्पाद न केवल पर्यटकों को खरीदारी का अनुभव प्रदान कर रहे हैं, बल्कि कलाकारों और शिल्पकारों की रचनात्मकता को भी सामने ला रहे हैं। ऐसे आयोजनों से पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिलने के साथ शिल्पकारों की आजीविका को मजबूत करने के अवसर भी मिलते हैं।

 

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(Release ID: 9875)