- पराली प्रबंधन को लेकर गांव-गांव चलाया जा रहा जागरूकता अभियान, किसानों को किया जा रहा प्रेरित
- मुनादी करवाकर किसानों को दी जा रही जानकारी, एक्स-सीटू और इन-सीटू प्रबंधन के बारे में भी किया जा रहा जागरूक
उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की ओर से जिले में पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गांव-गांव में मुनादी करवाकर किसानों को फसल अवशेष न जलाने और पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही गांवों में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को पराली प्रबंधन के सही तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि रविवार को गाँव खटकड़, डूमरखा खेड़ा, दनौदा, श्यामदो, भोंगरा, नेपेवाला , बड़ौदा, पोखरी और उझाना सहित जिले के अनेक गांवों में भी जागरूकता शिविर लगाए गए। इन शिविरों में किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और फसल अवशेषों का सही तरीके से प्रबंधन करने के बारे में बताया गया।
उन्होंने बताया कि किसानों को एक्स-सीटू और इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। एक्स-सीटू प्रबंधन में पराली को खेत से बाहर ले जाकर दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इन-सीटू प्रबंधन में फसल अवशेषों को खेत में ही कृषि यंत्रों की मदद से मिट्टी में मिलाया जाता है। इन तरीकों को अपनाकर पराली जलाने की जरूरत को कम किया जा सकता है।
डॉ. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को पराली जलाने के बजाय कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर भी नजर रखी जा रही है। इसके लिए विभाग की टीमें फील्ड में निगरानी कर रही हैं और ड्रोन की मदद से भी मॉनिटरिंग की जा रही है।
कृषि उपनिदेशक ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।