महर्षि वाल्मीकि की रामायण का आज भी कोई सानी नहीं : मनोहर लाल
- सूरजकुंड दिवाली मेले में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अर्पित किए पुष्प, उनके जीवन से मेहनत और शिक्षा की प्रेरणा लेने का आह्वान
Posted On:
26 Oct 2026 6:25PM
फरीदाबाद, 26 अक्टूबर।
महर्षि वाल्मीकि ने हजारों वर्ष पहले विश्वविख्यात महाकाव्य रामायण की रचना कर भारतीय साहित्य और संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की। रामायण का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है और इसकी शिक्षाएं पीढ़ियों को सत्य, मर्यादा, कर्तव्य तथा आदर्श जीवन का मार्ग दिखाती हैं। केंद्रीय विद्युत, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को सूरजकुंड दिवाली मेले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य का आदि कवि माना जाता है। उन्होंने संस्कृत भाषा में रामायण की रचना कर साहित्य जगत को ऐसी अनुपम कृति दी, जिसका आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ अध्ययन किया जाता है। रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों, आदर्शों और कर्तव्यों का मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ है। इसके प्रसंगों से समाज को सदाचार, धैर्य, त्याग और मानवता की सीख मिलती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को महर्षि वाल्मीकि के जीवन से कठिन परिश्रम, शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। महान विभूतियों के जीवन और उनके विचारों से परिचित कराने वाले आयोजन समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ युवाओं को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में हरियाणा सरकार द्वारा संत-महापुरुष विचार प्रसार एवं सम्मान योजना चलाई जा रही है। इस पहल के माध्यम से महान संतों, ऋषियों और महापुरुषों की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा उनकी जयंती श्रद्धा के साथ मनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और साहित्यिक परंपरा हमारी पहचान है। महर्षि वाल्मीकि जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपनाकर समाज में समानता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल महान विभूतियों को स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना भी है।
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(Release ID: 9942)