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पराली प्रबंधन को लेकर गांव-गांव चलाया जा रहा जागरूकता अभियान, किसानों को किया जा रहा प्रेरित

- एक्स-सीटू व इन-सीटू प्रबंधन के साथ खेत बचाओ अभियान के तहत भी ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक

Posted On: 27 Oct 2026 4:24PM


जींद, 27 अक्टूबर। डी डी कृषि डॉ सुखदेव कम्बोज ने बताया कि उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा जिले में पराली प्रबंधन को लेकर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत किसानों को फसल अवशेष न जलाने और पराली का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। गांवों में मुनादी करवाने के साथ-साथ जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
डीडी कृषि डॉ. सुखदेव कम्बोज ने बताया कि जिले के मंगलवार को खेड़ा खेमावती, बुड्ढा खेड़ा, आलनजोगी बरारखेड़ा, दात्ता सिंह वाला, बुढ़ाना और नागूरा सहित विभिन्न गांवों में पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को पराली न जलाने, कृषि यंत्रों का उपयोग करने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों को एक्स-सीटू और इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है। एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत पराली को खेत से बाहर ले जाकर विभिन्न उपयोगों में लाया जाता है, जबकि इन-सीटू प्रबंधन में कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है और पराली जलाने की आवश्यकता कम होती है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा पराली प्रबंधन के साथ-साथ खेत बचाओ अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत किसानों और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए गांवों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी कड़ी मे कैरखेड़ी सहित अन्य गांवों में भी अभियान के अंतर्गत जागरूकता गतिविधियां चलाई गई हैं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सके।
कृषि उपनिदेशक ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों और कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का प्रबंधन करें।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए विभागीय टीमें खेतों में निगरानी कर रही हैं। इसके अतिरिक्त ड्रोन की मदद से भी मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग का उद्देश्य किसानों को जागरूक कर पराली जलाने की घटनाओं को रोकना और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है।
डॉ. सुखदेव कम्बोज ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें।

 

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(Release ID: 9992)